मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

सरकार तक सुझाव

पूरे भारत में
यह नियम लागू
किया जाना चाहिए                                     
कि
जो भी व्यक्ति
सरकारी नौकरी में है।
चाहे
वो कलेक्टर हो
या SP
या कोई अन्य कर्मचारी।                              amazon.in    
सभी के बच्चे
सरकारी स्कूल में ही पढेंगे
और जिनके बच्चे
सरकारी स्कूल में
न पढते हो
उन्हें सरकारी नौकरियों से
निकाल दिया जाए।                                amazon.in     
सभी लोग
समझ सकते है कि
जब जिले के
कलेक्टर और SP
तथा
अन्य अधिकारीयों के बच्चे सरकारी स्कूल में
पढ़ना आरम्भ कर देंगे,
तो उन स्कूल में                                         amazon.in  
शिक्षा का स्तर
क्या होगा
और
शिक्षक किस तरह की
पढाई वहाँ करवाएँगे।
सभी शिक्षक स्कूल
समय पर आएँगे
और                                                           amazon.in     
अपना कार्य
पूरी ईमानदारी से करेंगे।
जो शिक्षक
किसी जुगाड़ के चलते
शिक्षक बने है
और पढाने में
असमर्थ है
वो स्वयं
अपना इस्तीफा
सरकार को सौंप देंगे।
शिक्षा के स्तर में
अचानक उछाल
आ जाएगा
और                                          amazon.in      
अपने देश के बच्चे भी
मिसाल कायम करेंगे।
और उनका इलाज भी सरकारी अस्पताल में
ही करवाना जरुरी हो
ताकि अस्पतालों की हालत में भी सुधार आ सके

Think and Live Long Relationship

बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें 

एक जौहरी के निधन के बाद उसका 
परिवार संकट में पड़ गया।

खाने के भी लाले पड़ गए।

एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे 
को नीलम का एक हार 
देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की 
दुकान पर ले जाओ।

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।

बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख
परखकर कहा- बेटा, 
मां से कहना कि अभी बाजार
बहुत मंदा है।

थोड़ा रुककर बेचना, 
अच्छे दाम मिलेंगे।

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि 
तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।

अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान 
पर जाने लगा और वहां हीरों 
रत्नो की परख का काम सीखने लगा।

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।
लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने 
आने लगे।

एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी
मां से वह हार लेकर आना और कहना 
कि अब बाजार बहुत तेज है

उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।

मां से हार लेकर उसने परखा तो 
पाया कि वह तो नकली है।

वह उसे घर पर ही छोड़ कर 
दुकान लौट आया।

चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?

उसने कहा, वह तो नकली था।

तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार
हार लेकर आये थे, तब मैं उसे 
नकली बता देता तो तुम सोचते कि 
आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा 
हमारी चीज को भी नकली 
बताने लगे।

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो
पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में 
हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं, 
सब गलत है।

और ऐसे ही गलत फहमी का शिकार 
होकर रिश्ते बिगडते है।

ज़रा सी सजिश पर ,ना छोड़ 
किसी अपने का दामन.
,
ज़िंदगी बीत जाती है 
अपनो को   
अपना बनाने में.

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

Save girls save world

एक औरत गर्भ से थी
पति को जब पता लगा
की कोख में बेटी हैं तो
वो उसका गर्भपात
करवाना चाहते हैं
दुःखी होकर पत्नी अपने
पति से क्या कहती हैं :-
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सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
वो खूब सारा प्यार हम पर
लुटायेगी,
जितने भी टूटे हैं सपने,
फिर से वो सब सजाएगी..
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 सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
जब जब घर आओगे
तुम्हे खूब हंसाएगी,
तुम प्यार ना करना
बेशक उसको,
वो अपना प्यार लुटाएगी..
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सुनो
ना मारो इस नन्ही कलि को,
हर काम की चिंता
एक पल में भगाएगी,
किस्मत को दोष ना दो,
वो अपना घर
आंगन महकाएगी..
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ये सब सुन पति
अपनी पत्नी को कहता हैं :-

सुनो
में भी नही चाहता मारना
इसनन्ही कलि को,
तुम क्या जानो,
प्यार नहीं हैं
क्या मुझको अपनी परी से,
पर डरता हूँ
समाज में हो रही रोज रोज
की दरिंदगी से..


क्या फिर खुद वो इन सबसे अपनी लाज बचा पाएगी,
क्यूँ ना मारू में इस कलि को,
वो बहार नोची जाएगी..
में प्यार इसे खूब दूंगा,
पर बहार किस किस से
बचाऊंगा,

जब उठेगी हर तरफ से
नजरें, तो रोक खुद को
ना पाउँगा..
क्या तू अपनी नन्ही परी को,
इस दौर में लाना चाहोगी,


जब तड़फेगी वो नजरो के आगे, क्या वो सब सह पाओगी,
क्यों ना मारू में अपनी नन्ही परी को, क्या बीती होगी उनपे,
जिन्हें मिला हैं ऐसा नजराना,
क्या तू भी अपनी परी को
ऐसी मौत दिलाना चाहोगी..


ये सुनकर गर्भ से
आवाज आती है…..
सुनो माँ पापा-
मैं आपकी बेटी हूँ
मेरी भी सुनो :-
  amazon.in पापा सुनो ना,
साथ देना आप मेरा,
मजबूत बनाना मेरे हौसले को,
घर लक्ष्मी है आपकी बेटी,
वक्त पड़ने पर मैं काली भी बन जाऊँगी
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पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, तुम उड़ान देना मेरे हर वजूद को,
में भी कल्पना चावला की तरह, ऊँची उड़ान भर जाऊँगी..

पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, आप बन जाना मेरी छत्र छाया,
में झाँसी की रानी की तरह खुद की गैरो से लाज बचाऊँगी…


पति (पिता) ये सुन कर
मौन हो गया और उसने अपने फैसले पर शर्मिंदगी महसूस
करने लगा और कहता हैं
अपनी बेटी से :-
amazon.in मैं अब कैसे तुझसे
नजरे मिलाऊंगा,
चल पड़ा था तेरा गला दबाने,
अब कैसे खुद को तेरेे सामने लाऊंगा,
मुझे माफ़ करना
ऐ मेरी बेटी, तुझे इस दुनियां में
सम्मान से लाऊंगा..

वहशी हैं ये दुनिया
तो क्या हुआ, तुझे मैं दुनिया की सबसे बहादुर बिटिया
बनाऊंगा.
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मेरी इस गलती की
मुझे है शर्म,
घर घर जा के सबका
भ्रम मिटाऊंगा
बेटियां बोझ नहीं होती..
अब सारे समाज में
अलख जगाऊंगा!!!

रविवार, 2 अप्रैल 2017

एक फ़कीर

एक फ़कीर नदी के किनारे बैठा था। किसी ने पूछा बाबा क्या कर रहे हो?
फ़कीर ने कहा "इंतज़ार कर रहा हूँ कि पूरी नदी बह जाएं तो फिर पार करूँ"
उस व्यक्ति ने कहा "कैसी बात करते हो बाबा पूरा जल बहने के इंतज़ार मे तो तुम कभी नदी पार ही नही कर पाओगे।"
फ़कीर ने कहा "यही तो मै सब लोगो को समझाना चाहता हूँ कि जीवन रहते जीवन को जी लो" वर्ना  यह कहते चले जाओगे कि                       

"एक बार जीवन की ज़िम्मेदारियाँ पूरी हो जाये तो"
" फिर घूमूँ फिरू सबसे मिलूँ सेवा करूँ।"

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सुन्दर पंक्तियाँ
" चेहरे की हंसी से गम को भुला दो
    कम बोलो पर सब कुछ बता दो
   ख़ुद ना रूठो पर सबको हंसा दो
      यही राज है जिन्दगी का
  जियो और जीना सिखा दो "
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सोमवार, 27 मार्च 2017

दुखी अध्यापक ( कविता)



 ल स्कूल में सब खुश थे
क्योंकि सारे बच्चे पास है
जो आये, वो पास
जो नहीं आये वो भी पास
जिसने परीक्षा दी ,वो भी पास
जिसने नहीं दी ,वो भी पास
सब खुश
मां बाप दोस्त रिश्तेदार
बस दुखी था तो वह अध्यापक जो
इसकी इस खोकली नीव के भविष्य
मे होने वाले पतन को देख रहा था
                                        
ओर जाने क्या सोच रहा था
मैं देना तो बहुत चाहता हूं दे नहीं पा रहा हूं



रविवार, 26 मार्च 2017

रेल यात्रियों के लिए

रेल यात्रियों के लिए
    New Facilities
               in
          Railway
          By Modi Govt

यात्रियों टिकट विंडो पर लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
                                    amazon.in 
ट्रेन का टिकट
ट्रेन में ही मिल जाएगा।

फिलहाल सुपरफास्ट ट्रेनों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है

जल्द ही बाकी ट्रेनों में भी यही व्यवस्था होगी।

इसके लिए टीटीई को टिकट शीन (हैंड-हेल्ड) मिलनी शुरू हो चुकीं हैं।

                                         amazon.in                                         *रेलवे ने प्रथम चरण में सुपर फास्ट ट्रेन*

लखनऊ मेल,

गरीब रथ,

अर्चना सुपरफास्ट,

राजधानी सुपरफास्ट आदि के टीटीई को हैंड-हेल्ड मशीन दी है

मशीन रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) सर्वर से कनेक्ट रहेगी।

इससे ट्रेन के हर कोच में खाली बर्थ और किस स्टेशन पर यात्री उतरेगा इसकी जानकारी मिलती रहेगी।

बिना टिकट लिए ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री सीधे टीटीई सेमिलेंगे

तय किराये से दस रुपये अतिरिक्त लेकर टीटीई इसी मशीन से टिकट देंगे।

इसके अलावा मशीन के जरिये ही वेटिंग टिकट वाले मुसाफिरों को बर्थ खाली होते ही मिल जाएगी

                                    *टीटीई की मनमानी होगी खत्म*

ट्रेन छूटने की जल्दी में सवार होने वाले मुसाफ़िरों से टीटीई और स्कवायड़ के सिपाही मनमाना जुर्माना एवं रुपयों की वसूली करते हैं!

इसके साथ ही वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को बर्थ न होने की बात कहकर बर्थ नहीं देते थे।

मगर हैंड-हेल्ड मशीन से यात्री भी अपनी बर्थ की पोजीशन देख सकेंगे।

                                                             *ट्रेन में चढ़ते ही*
टीटीई को बताना होगा
                                           amazon.in यात्री को
ट्रेन में सवार होते ही टीटीई को बताना होगा कि उसने टिकट नहीं लिया है।

मशीन से टिकट बनवाना है।

चेकिंग के दौरान यदि टीटीई ने बिना टिकट पकड़ा तो जुर्माना देना पड़ेगा

इसीलिए टीटीई को हैंड-हेल्ड मशीन दी जा रही हैं

सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्री
सवार होने के बाद भी
टीटीई से टिकट ले सकेंगे।

                                     amazon.in                                                                                                                          नीरज शर्मा,
                                                                                                                                                                 मुख्य जनसंपर्क अधिकारी,
                                                                                                                                                                             उत्तर रेलवे।

लिख दी

बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में।
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।।
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सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। 
बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।
लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार।
पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।
वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए।
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।।
सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को।
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।।
जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन।
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।।
जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी।
आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।।
दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था  जिस बेटी को जबरन बाप ने।
आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।।
मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो।
जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।।
जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों।
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।।

बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर।
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।।

आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर।
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।।
गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि।
इंसान हमसे अच्छा नोंचता  है।।

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर।
क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है।।