बुधवार, 8 मार्च 2017

माफ

दर्जनों ऐसे कवि देखने हैं जो कहते हैं बस कहते हैं होता है
 सुकून जिंदगी में अक्सर पर नफरतों के बयान देते है 
यह कोई और नहीं हमारे देश के नेता हैं जो बस कहते हैं कहते हैं कहते हैं
 होना है जो होकर रहता है
 बयानों से देश का क्या भला होता है 
हम तो वह भेड़ की तरह है जिसका कंबल हमको भी उड़ना है
 क्योंकि देश को ऐसे चलना है
बिजली का बिल 
 किसानों का पैसा माफ
 कर माफ
 एक दिन ऐसा समय आएंगे
 तुम्हारी जिंदगी मैं तूफान लाएगा माफ माफ करने वालों माफ ही तुम्हें रुलाएगा सत्ता मिलने के बाद 
 बोल नेता ही तुम पर कर लगाएगा 

एक तनख्वाह से कितनी बार  कर दूं और क्यों...जबाब है???
मैनें तीस दिन काम किया, 
तनख्वाह ली - कर दिया
मोबाइल खरीदा - कर दिया--'
रिचार्ज किया - कर दिया
डेटा लिया - कर दिया
बिजली ली - कर दिया
घर लिया -  कर दिया
TV फ्रीज़ आदि लिये -  कर दिया
कार ली -  कर दिया
पेट्रोल लिया - कर दिया
सर्विस करवाई -  कर दिया
रोड पर चला - कर दिया
टोल पर फिर -  कर दिया
लाइसेंस बनाया -  कर दिया
गलती की तो - कर दिया
रेस्तरां मे खाया -  कर दिया
पार्किंग का - कर दिया
पानी लिया - कर दिया
राशन खरीदा - कर दिया
कपड़े खरीदे -  कर दिया
जूते खरीदे - कर दिया
कितबें ली - कर दिया
टॉयलेट गया - कर दिया
दवाई ली तो -  कर दिया
गैस ली - कर दिया
सैकड़ों और चीजें ली ओर -  कर दिया, कहीं फ़ीस दी, कहीं बिल, कहीं ब्याज दिया, कहीं जुर्माने के नाम पर तो कहीं रिश्वत के नाम पर पैसा देने पड़े, ये सब ड्रामे के बाद गलती से सेविंग मे बचा तो फिर  कर दिया----
सारी उम्र काम करने के बाद कोई सोशल सेक्युरिटी नहीं, कोई पेंशन नही, कोई मेडिकल सुविधा नहीं, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल नहीं, पब्लिक ट्रांस्पोर्ट नहीं, सड़कें खराब, स्ट्रीट लाईट खराब, हवा खराब, पानी खराब, फल सब्जी जहरीली, हॉस्पिटल महंगे, हर साल महंगाई की मार, आकस्मिक खर्चे व् आपदाएं , उसके बाद हर जगह लाइनें।।।।
सारा पैसा गया कहाँ????
करप्शन में , 
इलेक्शन में ,
अमीरों की सब्सिड़ी में ,
माल्या जैसो के भागने में
अमीरों के फर्जी दिवालिया होने में ,
स्विस बैंकों में ,
नेताओं के बंगले और कारों मे,    
अब किस को बोलूं कौन चोर है???
आखिर कब तक हमारे देशवासी यूंही घिसटती जिन्दगी जीते रहेंगे?????

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

सोचा था

सोचा ना था भाग में कुछ ऐसा भी होगा
जो ना था हमारा वह आज हमारा होगा

रविवार, 29 जनवरी 2017

आखिरी सलाम.

सुना है अपनी कब्र पर चला जा रहा हूं
 इसी बीच भीड़ को जमा करें जा रहा हूं
 रोते हुए हुजूम को देखकर नींद में मुस्कुराते हुए जा रहा हूं
 सोचा है यह हाल तो सबका होगा हाल-ए-दिल सब को सुनाए जा रहा हूं
 कंधों पर उठाए हुए लोगों की धूल से अपनों को भुलाया जा रहा हूं 
आना नहीं कब्र पर मेरी कभी मुस्कुराते हुए इस दुनिया को रुक्सत किए जा रहा हूं 
       

                                                                                  आखिरी सलाम.   
  पुष्पेंद्र कुमार लेखक


मंगलवार, 10 जनवरी 2017

आत्मविश्वास की नई ताकत


  • यह कहानी मेरी खुद की है मेरा नाम संजीव है मेरे पिताजी का देहांत जब हो गया था जब मैं बहुत छोटा था घर में मेरी मां और दो छोटे भाई थे मेरे घर का पालन पोषण मजबूरी से होता था लेकिन मैं पढ़ना चाहता था घर की माली हालत खराब होने के कारण मुझे मजबूरी करनी पड़ती थी सुबह उठकर मैं पहले एक पंडित जी के अखबार डालता था फिर मजबूरी के लिए पुलिया पर जाता था पुलिया तो आप जानते ही होंगे कि क्या होती है यहां पर मजदूरों को काम मिलता है वहां से मैंने काम करना शुरू किया सबसे पहले मैंने एक ठेकेदार के यहां पर काम किया जिसने चेक डैम का काम ले रखा था वहां से मैंने काम करना शुरू किया लेकिन मैं पढ़ना चाहता था काम की वजह से मैं पढ़ नहीं पाता था फिर भी जब कभी काम की छुट्टी होती थी या काम के बाद मुझे वक्त मिलता था तो मैं पढ़ लेता था मैं पढ़ने में बहुत अच्छा नहीं था लेकिन मन में पढ़ने की इच्छा बहुत होती थी मां कहती थी कि पढ़ाई से जिंदगी बन जाती है और कोई भी व्यक्ति गरीब पैदा होता है लेकिन जरुरी नहीं कि वह गरीब मर जाए यही शब्द मेरी मां के मुझे बहुत हिम्मत देते थे जिसके कारण मुझे पढ़ाई में दिलचस्पी बनी रही और मजबूरी के साथ-साथ मैंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा मैंने बड़ी मुश्किल से हाई स्कूल की पढ़ाई पास की जब मैंने हाई स्कूल की परीक्षा पास कर ली उसके बाद मैंने पॉलिटेक्निक करने की मन में सोची लेकिन दुर्भाग्य के कारण मैंने पॉलिटेक्निक नहीं कर पाया जिस समय मैं पॉलिटेक्निक के फॉर्म भरने के लिए पॉलिटेक्निक गया उस समय फार्म भरने का समय खत्म हो चुका था लेकिन उसी समय आईटीआई के फॉर्म मिल रहे थे फॉर्म भरने का समय था तो मैंने आईटीआई के फॉर्म को खरीद लिया खरीदने के के बाद मैंने फॉर्म को भर लिया और जमा कर दिया परीक्षा का समय आया और मैं परीक्षा देने के लिए गया परीक्षा झांसी मे थी और मैं बबीना में रहता था जो कि झांसी से 26 किलोमीटर दूरी पर था मेरे पास किराए के लिए पैसे भी नहीं थे और मालिक से पैसे मांगे तो उसने पूछा कि पैसे किस लिए चाहिए कल ही तो मैंने खर्चे के लिए पैसे दिए थे मैंने कहा साहब कल मेरी परीक्षा है आईटीआई की तो मालिक ने कहा पढ़ लिख कर क्या करेगा पढ़ लिख कर किसी का भला हुआ है क्या जा काम कर काम और उन्होंने मुझे पैसे नहीं दिए मैंने सोचा अब मैं परीक्षा देने के लिए कैसे जाऊंगा तो मैंने अपने मित्र से पैसे मांगे तो उसके पास भी पैसे नहीं थे मैंने सोचा कि मुझे यह परीक्षा किसी भी हालत में देनी है मैंने अपने पिताजी की साइकिल उठाई जोकि बहुत ही पुरानी जंग खाई थी उसी से मैं झांसी परीक्षा देने गया परीक्षा देने के बाद रोज की तरह अपने कामों में लग गया उस समय बहुत ही काम मदना चल रहा था तो मैं जंगल चला जाता था जहां पर मैं घंटो बैठ कर अपने भविष्य के बारे में सोचा करता था सोचते सोचते एक दिन मेरे दिमाग में मुझे एक तरकीब आई मैंने जंगल में बांस के पेड़ों को देखा और उन पेड़ों को काट कर उनसे चली और बांस के डंडे और लठ तैयार किए उनको किरायों पर चलाने लगा सबसे पहले मैंने 10 चली 20 फुट के 15 बांस तैयार किए इसी से मैंने अपना छोटा सा कारोबार शुरु किया लेकिन मैं काम नहीं करना चाहता था लेकिन घर की हालत सही नहीं थी इसीलिए मुझे काम करना पड़ रहा था मेरी उम्र करीम उस समय साढे 14 साल थी मैं पढ़ना चाहता था उसी समय मेरा आईटीआई का परीक्षाफल आ गया मैंने सोचा जब इतने पढ़ने वाले बच्चों का आईटीआई में नहीं होता तो मेरा आईटीआई में कैसे हो जाएगा और मैंने अपना परीक्षाफल नहीं देखा और रोज की तरह अपने काम में लग गया परीक्षाफल निकलने के 2 दिन बाद साइड पर काम कर रहा था तो मेरे मित्र ने मुझसे पूछा तेरी आईटीआई का परीक्षा का फल निकल आया है तूने देखा है क्या मैंने भी बे मन से कहा मैंने अपनी आईटीआई का परीक्षा फल नहीं देगा क्योंकि मैं पढ़ाई में इतना अच्छा नहीं हूं और बच्चे कितना पढ़ते हैं जब उनका नहीं हुआ तो मेरा कैसे होगा तो मेरे मित्र ने कहा चलो देखते हैं कि तेरा हुआ है या नहीं मैंने सोचा की चलो देखते हैं कि मेरा हुआ है कि नहीं मन में तो था कि मेरा आईटीआई में नहीं होगा पहले मैंने देखा मुझे मेरा रोल नंबर नहीं दिखाई दिया मैंने कहा था ना मेरा आईटीआई में नहीं होगा मेरे मित्र ने कहा जरा मुझे अखबार दिखाना मैं देखता हूं जब मेरे मित्र ने अखबार को उठाया और देखा तो उसमें मेरा रोल नंबर और ट्रेन कोड लिखा था मेरे दोस्त ने मुझसे कहा तेरे को देखना नहीं आता यह किसका रोल नंबर है मैंने देखा और देखते ही साथ मेरी आंखों में आंसू भर आए मैंने कहा कि यह कैसे हो गया मुझे यकीन नहीं हो रहा था मेरा नाम आईटीआई में आ गया उसके एक हफ्ते बाद आईटीआई से कॉल लेटर आया जिसमें लिखा था आपका सलेक्शन औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में 07 इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में हो गया है अपने समस्त दस्तावेजों को लेकर आईटीआई मैं लेकर आए  
  • मैं फिर परेशान हो गया क्योंकि आईटीआई झांसी में था जब परीक्षा के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे तो आईटीआई जाने के लिए, आईटीआई की फीस ,किताबों के लिए पैसे कहां से आएंगे मैं कॉल लेटर को लेकर सड़क पर बैठ कर रोने लगा सोचने लगा कि मैं आईटीआई में कैसे पढूंगा और मां की कही हुई बातों को कैसे पूरा करुंगा
  • मैंने अपने आप को संभाला और साइकिल लेकर आईटीआई गया आईटीआई में एडमिशन फीस 240 रुपए थी और मेडिकल बाहर से करवा कर लाना था जिस की फीस  ₹200 जबकि स्कूल वालों की तरफ से डॉक्टर था स्कूल वाले सरकारी हॉस्पिटल का मेडिकल स्वीकार नहीं कर रहे थे बस उसी का मेडिकल स्वीकार कर रहे थे मेरे पास तो एक रुपए भी नहीं था उस दिन मैं बिना एडमिशन के घर आ गया और सोचने लगा की अपना एडमिशन कैसे कराएं मैंने सोचा कि अपने मालिक से कुछ पैसे ले लूंगा लेकिन मालिक एडवांस पैसे नहीं देता तो पैसा किससे लूं क्योंकि गरीब को तो कोई भी पैसे नहीं देता मुझे कौन देता मैं बबीना के काली माता के मंदिर गया जोकि आर्मी केंट मैं माना हुआ मंदिर था वहां बैठकर भगवान से प्रार्थना कर रहा था की है भगवान मुझे एडमिशन के लिए पैसे दे दो लेकिन मुझे पैसा देता कौन मैंने देखा काली माता के मंदिर में बढ़ोतरी की थाली में बहुत सारा पैसा रखा है मैंने उन पैसों को उठा लिया उठा और वहां से चला गया मैंने सोचा कि मैं एडमिशन करवा लूंगा लेकिन मेरे मन को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था लग रहा था जैसे मैंने किसी के घर को लूट लिया हो तो मैंने अपनी यह बात अपनी मां को बता दिया मेरी मां ने मुझे जोर से एक चमाट लगाया और कहां यह तूने क्या किया मुझसे कहा होता मैं तुझे पैसे देती करती मैंने मां से कुछ भी नहीं कहा और रोज की तरह काम पर चला गया

शाम को जब मैं घर पर आया तो मेरी मां ने मुझे कहा बेटा कितने पैसे लग रहे हैं एडमिशन में और कितने की आ रही है तेरी किताबें मैंने मां से कहा मां किताबें करीब 1500 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक की आएंगी और एडमिशन में 440 रुपए तक लगेंगे मेरी मां ने मुझे 3000 रुपए दिए और कहा जा कल सुबह जाकर एडमिशन करा लेना मैंने कहा मां सारे पैसे अगर किताबों में और एडमिशन में खर्च कर दूंगी तो घर का खर्च कैसे चलाओगे मां ने कहा बेटा चिंता मत कर सब ऊपरवाला करेगा मुझे उस रात नींद नहीं आई मन में बहुत सी उलझन चल रही थी की मैं पढ़ने जाऊं की घर के खर्च के लिए काम करूं समझ में नहीं आ रहा था सरकार कहती है पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया तो मैं पढ़ना चाहता हूं लेकिन कैसे पढे अगर पढ़ता हूं तो पेड़ जाता है और नहीं पड़ता तो भविष्य जाता है ऐसे में मैं क्या करूं इसी चीज को सोचते सोचते सुबह हो गई मैं उठा नहाया कपड़े पहने और साइकिल उठाकर आईटीआई पहुंचा वहां सबसे पहले मैंने अपना मेडिकल कराया और 200 रुपए दिए उसके बाद अपनी सारे डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी कराने के बाद 240 रुपए देकर अपना एडमिशन करवाया एडमिशन करवाने के बाद मैं झांसी से एक किताब लेकर आया और फिर कॉपी और एक पैन बाकी पैसे मैंने अपनी जेब में रख लिए मैंने सोचा अभी एक ही किताब से काम चला लूंगा बाद में किताब खरीद लूंगा घर पहुंचा और बाकी के पैसे मैंने अपनी मां के हाथ में दे दिए मां ने कहा बेटा एडमिशन हो गया और किताबें खरीद ली मैंने मां से कहा हां मां किताबें खरीद ली एडमिशन हो गया मां ने कहा कल से आईटीआई जाना मैंने मां से कहा ठीक है

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

पब्लिक डीलिंग कl अच्छl मित्र कहानी



मेरा नाम दीपक है मैं उत्तर प्रदेश मैं रहता हूं मैं जब इंटर की परीक्षा के बाद कंपटीशन की तैयारी के लिए दिल्ली गए तो वहां मैंने देखा जो माहौल दिल्ली का था वह गांव का नहीं था मुझे वहां का माहौल समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि मुझे वहां की हर चीज बिल्कुल अलग ही दिखाई दे रही थी हर चीज में लोगों का बनावटी चेहरा दिखाई दे रहा था जाने किस के पीछे दौड़ रहे थे जीवन में झूठ फरेब धोखा ही दिखाई दे रहा था बनाबटी कपड़े बनाबटी चेहरे और बनाबटी घर सब कुछ बनाबटी ऐसे में मैं कंपटीशन की तैयारी कैसे करता मुझे समझ में नहीं आ रहा था मुझे एक अच्छे मित्र की आवश्यकता थी जो मेरी भावनाओं को मेरी शब्दावली मैं मुझे बता सकता था बड़ी मुश्किल के बाद मुझे एक मित्र मिला जिसका नाम अमित था जिसने मुझे बड़े ही प्यार से विनम्रता से पढ़ाया मैं 3 महीने तक लगातार कंपटीशन की तैयारी करता रहा जब जाकर मुझे कुछ समझ में आया की कंपटीशन की तैयारी क्या होती है क्योंकि मेरा पब्लिक डीलिंग करने का तरीका या मित्रों से बात करने का तरीका मुझे अमित ने बताया उसने बताया की दुनिया में कोई भी काम के लिए जरूरी नहीं की आप होशियार हो लेकिन आपकी जुबान से निकला हुआ शब्द जो भी हो साफ होना चाहिए जिससे सामने वाले पर प्रभाव पड़े जिस से उस व्यक्ति को आपके बारे में एक प्रकार का विचार बनता है उसी विचार से सामने वाला आप पर हावी या आप उस पर हावी होते हैं अगर आपको भाषण देना है तो आपकी वाणी में विनम्रता के साथ साथ थोड़ा सा जोश भी होना चाहिए जैसे की मुझे विद्यालय के एक छात्र को पढ़ने के लिए उत्साहित करना है तो मैं उससे कहूंगा कि बेटा जिंदगी में अगर कुछ भी बनना है तो पढ़ाई करना बहुत जरुरी है पढ़ाई करने से जिंदगी बहुत अच्छी हो जाती है अगर इसी शब्दों को हम विनम्रता से और प्यार से समझाएंगे तो उस विद्यार्थी पर प्रभाव पड़ेगा और वह आपकी बातों पर विचार भी करेगा लेकिन अगर यही बात उसे पूरी कक्षा में सबके सामने और डांटकर कहा जाए तो वह उस पर विचार नहीं करेगा और उसका प्रभाव उल्टा पड़ेगा इसीलिए अगर उस काम को उस विद्यार्थी से कराना है तो हमें सबसे पहले हमें यह माहौल देखना होता है कि विद्यार्थी कैसा है वहां का माहौल कैसा है और वह कहां से आया है या किस परिवेश से आया है बस इसी से आप उसके बारे में पता कर सकते हैं और सबसे महत्वपूर्ण भाग पब्लिक डीलिंग में व्यक्ति के अंदर आत्म विश्वास होना आवश्यक होता है अगर किसी भी व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास की कमी है तो वह कभी भी पब्लिक डिलीट नहीं कर सकता जैसे कि नर्वस होना घबराना बोलचाल में अटकना और सामने वाले की आंखों में आंखें डाल कर बातें ना करना अगर हमें पब्लिक डीलिंग करना है तो हमें इन चीजों पर हमेशा ध्यान रखना आवश्यक है अगर हम इन चीजों पर ध्यान रखेंगे तो हम कभी भी किसी भी व्यक्ति या मित्र से किसी भी प्रकार की बात कर सकते हैं उसे समझा सकते हैं और उसके बारे में या उसको अपने बारे में बता सकते हैं कुछ विद्यार्थी जो इंटरव्यू में फेल हो जाते हैं तो उसका सबसे बड़ा कारण यही होता है कि उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होती है इसी के बारे में मुझे बड़े ही प्यार से अमित ने समझाया और उसने यह बतलाया कि दिल्ली जैसे शहर में आत्मविश्वास से किया हुआ काम ही सफल होता है और पढ़ाई में होशियार होने के साथ-साथ आपको इन चीजों पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है जब जाकर आपको किसी भी प्रकार की सर्विस या जॉब मिल सकती है लेकिन अगर आप इस पर विचार नहीं करेंगे तो आप कितनी भी प्रकार की पढ़ाई करने तो आप सफल तो हो सकते हैं लेकिन आप किसी भी चीज पर अपना पूर्ण प्रभुत्व जमा नहीं सकते आप हमेशा कशमकश की लड़ाई लड़ते रहेंगे की है दुनिया किस तरह से चल रही है टीचिंग की जॉब टीचर का काम नहीं कर सकते अधिकारी पद पर होकर अधिकारी का काम नहीं कर सकते नेता नेतागिरी का काम नहीं कर सकते अगर एक सेनानायक अपनी सेना को अगर कमांड नहीं कर सकता तो वह कभी भी सेनानायक नहीं बन सकता इसीलिए पब्लिक डिलीट बहुत ही आवश्यक होती है इस बात को उसने मुझे बहुत ही प्यार से बताया उस दिन के बाद मैं किसी भी मित्र से मिलता तो इन बातों पर बहुत ही विचार करता मैं इन विचारों को आप लोगों के सामने इसलिए बता रहा हूं जिससे कि आप लोगों के अंदर किसी भी प्रकार की या किसी भी प्रकार का कोई भी सवाल हो जो आप किसी के सामने कहना चाहते हैं तो इन शब्दों को अवश्य ही याद रखना कि हमें कभी भी किसी के सामने डरना नहीं और घबराना नहीं और बोलने में हिचकिचाना नहीं तो उस व्यक्ति पर आपका बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ेगा अगर आप जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो जो भी कुछ है उसे बड़े ही विनम्रता से उस व्यक्ति के सामने रखें वह व्यक्ति या तो उस पर विचार करेगा या नहीं करेगा लेकिन आपका बोलचाल अगर ढंग का रहा तो हो नहीं सकता है कि वह आपकी बातों पर विचार ना करें

लेखक पुष्पेंद्र कुमार

सोमवार, 28 नवंबर 2016

आज दुनिया कविता

दुनिया बहुत बदल गई दुनिया को क्या कहना है
दुनिया में जो कुछ भी है बस नाम किसी का लेना है

काम अगर हम ना करें तो नाम किसी का लेना है
और काम अगर कोई करे तो नाम अपना लेना है

दुनिया बहुत बदल गई दुनिया से क्या कहना है
दुनिया में जो कुछ भी है बस नाम किसी का लेना है

जिस काम से आंखे नम करोवो काम अभी हमें करना है
|जिस काम से दुनिया है चलेवह काम अभी नहीं करना है

दुनिया बहुत बदल गई दुनिया से क्या कहना है
दुनिया में जो कुछ भी बस नाम किसी का लेना है

जिस काम में भाव है मिले उसे काम को अभी है करना है
जिस काम में भाव ना मिले वह काम अभी नहीं करना है

दुनिया बहुत बदल गई दुनिया से क्या कहना है
दुनिया में जो कुछ भी है बस नाम किसी का लेना है

धोखा झूठ और फरेब बस इनका बोल बाला है
जो सच्चे मन से काम करें बस उसका मुंह काला है

दुनिया बहुत बदल गई दुनिया से क्या कहना है
दुनिया में जो कुछ भी है बस नाम में किसी का लेना है

झूठ में जितना भी बल हो सच से कम ही होता है
सच कितना भी बल कम हो पर झूठ से अधिक होता है


·                                                                                                स्वर्गीय श्री लखन लाल जी के चरणो में अर्पण उनके पुत्र पुष्पेंद्र कुमार की ओर से

जिंदगी कविता

                                             
       

जिंदगी जीने का मकसद खास होना चाहिए
और अपने आप पर विश्वास होना चाहिए
जीवन मैं दुख की कोई कमी नहीं है
बस जीने का अंदाज़ होना चाहिए।


भीगी जिंदगी की मुस्कान से आंसू नहीं मिलते
सोती हुई जिंदगी से इंसान नहीं मिलते
मर गया हो जमीर जिसका
उससे भगवान नहीं मिलते

उठना नहीं चलना है

किसी और के लिए नहीं
अपनों के लिए ही करना हैं
राहों में शूल है इतने शूल पर ही चलना है
गद पद का संघ है शूल से क्या करना है

जिंदगी दुख तो बहुत देती है

अरे बर्दाश्त करने वाला होना चाहिए
विश्वास से जो जिए जिंदगी को वह ऐसा होना चाहिए
जिंदगी में दुख तो आते हैं जाते हैं

उनका सामना करना चाहिए
विश्वास से जो जिंदगी को जिए वह एहसास होना चाहिए
     

                                                                         लेखक                                                                                                पुष्पेंद्र कुमार