सोमवार, 27 मार्च 2017

दुखी अध्यापक ( कविता)



 ल स्कूल में सब खुश थे
क्योंकि सारे बच्चे पास है
जो आये, वो पास
जो नहीं आये वो भी पास
जिसने परीक्षा दी ,वो भी पास
जिसने नहीं दी ,वो भी पास
सब खुश
मां बाप दोस्त रिश्तेदार
बस दुखी था तो वह अध्यापक जो
इसकी इस खोकली नीव के भविष्य
मे होने वाले पतन को देख रहा था
                                        
ओर जाने क्या सोच रहा था
मैं देना तो बहुत चाहता हूं दे नहीं पा रहा हूं



रविवार, 26 मार्च 2017

रेल यात्रियों के लिए

रेल यात्रियों के लिए
    New Facilities
               in
          Railway
          By Modi Govt

यात्रियों टिकट विंडो पर लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
                                    amazon.in 
ट्रेन का टिकट
ट्रेन में ही मिल जाएगा।

फिलहाल सुपरफास्ट ट्रेनों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है

जल्द ही बाकी ट्रेनों में भी यही व्यवस्था होगी।

इसके लिए टीटीई को टिकट शीन (हैंड-हेल्ड) मिलनी शुरू हो चुकीं हैं।

                                         amazon.in                                         *रेलवे ने प्रथम चरण में सुपर फास्ट ट्रेन*

लखनऊ मेल,

गरीब रथ,

अर्चना सुपरफास्ट,

राजधानी सुपरफास्ट आदि के टीटीई को हैंड-हेल्ड मशीन दी है

मशीन रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) सर्वर से कनेक्ट रहेगी।

इससे ट्रेन के हर कोच में खाली बर्थ और किस स्टेशन पर यात्री उतरेगा इसकी जानकारी मिलती रहेगी।

बिना टिकट लिए ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री सीधे टीटीई सेमिलेंगे

तय किराये से दस रुपये अतिरिक्त लेकर टीटीई इसी मशीन से टिकट देंगे।

इसके अलावा मशीन के जरिये ही वेटिंग टिकट वाले मुसाफिरों को बर्थ खाली होते ही मिल जाएगी

                                    *टीटीई की मनमानी होगी खत्म*

ट्रेन छूटने की जल्दी में सवार होने वाले मुसाफ़िरों से टीटीई और स्कवायड़ के सिपाही मनमाना जुर्माना एवं रुपयों की वसूली करते हैं!

इसके साथ ही वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को बर्थ न होने की बात कहकर बर्थ नहीं देते थे।

मगर हैंड-हेल्ड मशीन से यात्री भी अपनी बर्थ की पोजीशन देख सकेंगे।

                                                             *ट्रेन में चढ़ते ही*
टीटीई को बताना होगा
                                           amazon.in यात्री को
ट्रेन में सवार होते ही टीटीई को बताना होगा कि उसने टिकट नहीं लिया है।

मशीन से टिकट बनवाना है।

चेकिंग के दौरान यदि टीटीई ने बिना टिकट पकड़ा तो जुर्माना देना पड़ेगा

इसीलिए टीटीई को हैंड-हेल्ड मशीन दी जा रही हैं

सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्री
सवार होने के बाद भी
टीटीई से टिकट ले सकेंगे।

                                     amazon.in                                                                                                                          नीरज शर्मा,
                                                                                                                                                                 मुख्य जनसंपर्क अधिकारी,
                                                                                                                                                                             उत्तर रेलवे।

लिख दी

बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में।
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।।
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सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। 
बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।
लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार।
पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।
वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए।
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।।
सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को।
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।।
जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन।
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।।
जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी।
आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।।
दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था  जिस बेटी को जबरन बाप ने।
आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।।
मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो।
जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।।
जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों।
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।।

बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर।
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।।

आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर।
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।।
गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि।
इंसान हमसे अच्छा नोंचता  है।।

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर।
क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है।।

बिजली चोरी के 12 तरीके लगा रहे हैं बिजली विभाग को बड़ी चपत

 बिजली चोरी के 12 तरीके लगा रहे हैं बिजली विभाग को बड़ी चपत
 बिजली चोरी को रोकने के लिए पहले मेनुअल मीटर में होने वाली छेड़छाड़ को खत्म करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाए गए हैं लेकिन बिजली चोरों ने इलेक्ट्रॉनिक मीटर का भी तोड़ निकाल लिया है बिजली चोरी करने वालों को शायद इस बात की जानकारी नहीं है लेकिन अगर बिजली चोरी में पकड़े जाते हैं तो उन्हें मौजूदा बिल के साथ समन शुल्क जो की लोड पर आधारित है और अधिभार जो की अवर अभियंता के द्वारा लगाया जाता है जिसे विभाग के बाबू तैयार करते हैं           amazon.in 
1. रिमोट-- बिजली चोरी के लिए एक उपभोक्ता ने खिलौने के रिमोट से मीटर को कंट्रोल करता है ऐसे मैं जब भी बिजली विभाग के अधिकारी चेक करने आते थे वह रिमोट से मीटर चला देता था रिमोट tv का भी होता है
2. इंजेक्शन से मीटर को जमा करके-- इंजेक्शन के जरिए मीटर की स्क्रीन में एसिड डाल कर इस स्क्रीन को खराब कर देती थे जिसके चलते औसतन बिल विभाग की ओर से उपभोक्ता को भेजा जाता है    amazon.in
3. रजिस्टेंस लगाकर होती है बिजली चोरी-- मीटर में रजिस्टेंस लगाकर बिजली चोरी का तरीका काफी पुराना है लेकिन इसका प्रयोग करके लोग आज भी मीटर को धीमा करते हैं                 amazon.in
4. क्रिस लिन और पानी डाल कर पुश बटन को जाम कर देते हैं-- पुश बटन में ग्रीस लिंग और पानी डालकर उस बटन को जाम कर दिया जाता है जिसके जरिए मीटर खुल नहीं पाता था और डिस्प्ले के साथ छेड़छाड़ सामने नहीं आती है                             amazon.in
5. एक्स-रे चिप लगाकर करते हैं बिजली चोरी-- मीटर में एक्स-रे चिप के जरिए मीटर को काफी धीमा कर दिया जाता है जिससे बेल कम आता है
6. कटिया डालकर बिजली चोरी-- कटिया डालकर बिजली चोरी काफी पारंपरिक तरीका है जो आज भी कई इलाकों में अपनाई जाती है और यह abc केबल में मीटर से पहले दो पिन लगा कर या दो कीले लगाकर कटिया चलाते हैं                                  amazon.in
7. मीटर के साथ टेंपरिंग करके-- मीटर को अक्सर लोग क्षतिग्रस्त कर उसे बंद कर देते हैं बाद में उसे बदलने की अपील करते हैं जिसके बाद बिजली बिल काफी दिनों तक औसत के आधार पर दिया जाता है
8. विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत करके बिजली विभाग के अधिकारी कुछ पैसे की लालच में मीटर को सीलिंग में डाल देते हैं जिसके बाद बिल औसत के आधार पर आता है                amazon.in      
 9.चुंबकीय जरिए अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां इलेक्ट्रॉनिक मीटर नहीं लगे हैं वहां चुंबक के जरिए मीटर को धीमा किया जाता है उदाहरण के लिए काले मीठा और और भी                        amazon.in
10. अर्थ के तार को काटकर होती है चोरी-- मीटर में लगने वाले अर्थ के तार को काटकर बीच में डिवाइस लगा दी जाती है ऐसे में मीटर की रेडिंग नहीं बढ़ती है
11. मीटर में रीडिंग छोड़ कर-- बिजली विभाग के कर्मचारी कुछ पैसे की लालच में मीटर में रीडिंग छोड़ देते हैं और उपभोक्ता से कुछ पैसे लेकर मीटर को क्षतिग्रस्त कर देते हैं या बदल देते हैं
12. मीटर को IDF,CNF कर कर-- मीटर से 30, 35 यूनिट का बिल निकालने के बाद उसे IDF कर दिया जाता है बिजली कर्मचारियों के द्वारा जिसका बिल अधिक हो जाता है उसे अपने क्षेत्र से हटाकर दूसरे के क्षेत्र में डाल देते हैं जिससे बिल उनकी मशीन में नहीं आता और कुछ दिनों बाद उस पर नया सयोजन हो जाता है

शनिवार, 25 मार्च 2017

हिन्दुओ का मूर्खता दिवस अप्रैल फूल

अप्रैल फूल" किसी को कहने से पहले
इसकी          amazon.in         
वास्तविक सत्यता जरुर जान ले.!!
पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस
कह रहे                  amazon.in  
हो !!
पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल
का                      amazon.in                
अर्थ है - हिन्दुओ का मूर्खता दिवस).??
ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है…
मुर्ख हिन्दू कैसे समझें "अप्रैल फूल" का मतलब बड़े
दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल,
अप्रैल फूल ???            amazon.in     
इसका मतलब क्या है.?? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजो
द्वारा हमे 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस
समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1 अप्रैल से
अपना                       amazon.in
नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओ
द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही
खाते                      amazon.in  
और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू
होते है, पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत
ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते
हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस "अप्रैल फूल" का नाम
दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप
ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने
सही हो
आप.?               amazon.in
यादरखो अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और
त्यौहार                 amazon.in
1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है
(शुक्ल प्रतिपदा)             amazon.in
2. हिन्दुओ के रीति -रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर
के अनुसार बनाये जाते है।
6. आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है।
अंग्रेज ईसाई, हिन्दुओ के विरुध थे इसलिए हिन्दू के
त्योहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप
हिन्दू भी बहुत शान से कह रहे हो.!!
गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो अप्रैल फूल लिख
के.!!                    amazon.in      
अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको
पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और
मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था। 1582 में पोप
ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान
जारी                     amazon.in
कर दिया जिसमें 1 जनवरी को नया साल का प्रथम
दिन बनाया गया।            amazon.in
जिन लोगो ने इसको मानने से इंकार किया, उनको 1
अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे-
धीरे                          amazon.in       
1 अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख
दिवस बन गया।आज भारत के सभी लोग अपनी ही
संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे
है।
जागो हिन्दुओ जागो।।                 amazon.in
अपने धर्म को पहचानो।
इस जानकारी को इतना फैलाओ कि कोई भी इस आने वाली 1 अप्रैल से मूर्खता का परिचय न दे और और अंग्रेजों द्वारा प्रसिद्ध किया गया ये हिंदुओं का मजाक बंद होजाये ।

जय हिन्द

प्यार के नियम की खोज

न्यूटन की तरह भी प्यार के नियम की खोज की है जो इस प्रकार है :-
सार्वत्रिक (यूनिवर्सल) नियम:
                             amazon.in प्यार को न तो पैदा किया जा सकता है और न
ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल कुछ धन
की क्षति के साथ एक गर्ल फ्रेंड से दूसरी गर्लफ्रेंड में
स्थानांतरित किया जा सकता है
                        amazon.in
पहला नियम :-लड़का , लड़की को हमेशा प्यार
करता रहेगा और लड़की भी लडके को प्यार
करना जारी रखेगी तब तक जब तक कि कोई
बाह्य बल (लड़की के बाप एवं भाई द्वारा लडके
की टाँगे तोड़कर ) न लगाया जाये
                      amazon.in    
दूसरा नियम:-एक दुसरे के प्रेम में डूबे युगल में
लड़की द्वारा लड़के से किये जाने वाले प्रेम
की मात्रा में परिवर्तन, लडके के बेंक बेलेंस
की मात्रा के अनुक्रमानुपाती होता है
                    amazon.in  
तीसरा नियम -लड़की द्वारा प्रेम निवेदन
अस्वीकार किये जाने में प्रयुक्त आरोपित बल,
उसके सेंडल द्वारा प्रयोग किये जाने वाले बल के
समान एवं विपरीत दिशा में होता है

                         amazon.in मार्केट में एकदम नया है जल्दी शेयर करो 

धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा.

.
.मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का.....
कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं....
                                            amazon.in .जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..                               
                                         amazon.in                               
बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी...
                                          amazon.in 
खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं...

अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये....
                                          amazon.in जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...
                                          amazon.in                            
खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है...

ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं.....
                                            amazon.in इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है.......

हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है..

मनुष्य का अपना क्या है ?
जन्म :-     दुसरो ने दिया
नाम  :-     दुसरो ने रखा                          amazon.in
शिक्षा :-    दुसरो ने दी
रोजगार :- दुसरो ने दिया और
शमशान :- दुसरे ले जाएंगे
तो व्यर्थ में घमंड किस बात पर करते है लोग

बुधवार, 22 मार्च 2017

Very heart touching Story...



एक पाँच छ: साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था ।                         
                                          amazon.in        
कपड़े में मैल लगा हुआ था मगर निहायत साफ, उसके नन्हे नन्हे से गाल आँसूओं से भीग चुके थे ।
                                        amazon.in
बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था ।

जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़ के उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा : -
"क्या मांगा भगवान से"
उसने कहा : -                      amazon.in
"मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग,
मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र,
मेरी बहन माँ से कपडे सामान मांगती है उसके लिए पैसे"..
                                        amazon.in 
"तुम स्कूल जाते हो"..?
अजनबी का सवाल स्वाभाविक सा सवाल था ।

हां जाता हूं, उसने कहा ।
                                       amazon.in
किस क्लास में पढ़ते हो ? अजनबी ने पूछा

नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता, मां चने बना देती है वह स्कूल के बच्चों को बेचता हूँ ।
बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं, हमारा यही काम धंधा है ।
बच्चे का एक एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था ।
                                        amazon.in   
"तुम्हारा कोई रिश्तेदार"
न चाहते हुए भी अजनबी बच्चे से पूछ बैठा ।

पता नहीं, माँ कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता,
माँ झूठ नहीं बोलती,           amazon.in 
पर अंकल,
मुझे लगता है मेरी माँ कभी कभी झूठ बोलती है,
जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है ।
जब कहता हूँ
माँ तुम भी खाओ, तो कहती है मैने खा लिया था, उस समय लगता है झूठ बोलती है ।

बेटा अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाय तो पढाई करोगे ?
"बिल्कुलु नहीं"

"क्यों"
पढ़ाई करने वाले, गरीबों से नफरत करते हैं अंकल,
हमें किसी पढ़े हुए ने कभी नहीं पूछा - पास से गुजर जाते हैं ।

अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी ।

फिर उसने कहा
"हर दिन इसी इस मंदिर में आता हूँ,
कभी किसी ने नहीं पूछा - यहाँ सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे - मगर हमें कोई नहीं जानता ।

"बच्चा जोर-जोर से रोने लगा"

 अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं ?

मेरे पास इसका कोई जवाब नही था...

ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं ।
बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतीमों, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए .........................

मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस - पास किसी गरीब को देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो ।

आपको पसंद आऐ तो सब काम छोडके ये मेसेज कम से कम एक या दो गुरुप मे जरुर डाले ।
कहीं गुरुप मे ऐसा देवता ईन्सान मिल जाऐ ।
कहीं एसे बच्चो को अपना भगवान मील जाए ।
कुछ समय के लिए एक गरीब बेसहारा की आँख मे आँख डालकर देखे, आपको क्या महसूस होता है ।

फोटो या विडीयो भेजने कि जगह ये मेसेज कम से कम एक या दो गुरुप मे जरुर डाले ।

 स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें ।

फागुन के महीने

कौन रंग फागुन रंगे, रंगता कौन वसंत?
प्रेम रंग फागुन रंगे, प्रीत कुसुंभ वसंत।
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चूड़ी भरी कलाइयाँ, खनके बाजू-बंद,
फागुन लिखे कपोल पर, रस से भीगे छंद।
                    amazon.in                               
फीके सारे पड़ गए, पिचकारी के रंग,
अंग-अंग फागुन रचा, साँसें हुई मृदंग।
                    amazon.in
धूप हँसी बदली हँसी, हँसी पलाशी शाम,
पहन मूँगिया कंठियाँ, टेसू हँसा ललाम।
                 amazon.in 
कभी इत्र रूमाल दे, कभी फूल दे हाथ,
फागुन बरज़ोरी करे, करे चिरौरी साथ।
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नखरीली सरसों हँसी, सुन अलसी की बात,
बूढ़ा पीपल खाँसता, आधी-आधी रात।
                           amazon.in   
बरसाने की गूज़री, नंद-गाँव के ग्वाल,
दोनों के मन बो गया, फागुन कई सवाल।
                   amazon.in  
इधर कशमकश प्रेम की, उधर प्रीत मगरूर,
जो भीगे वह जानता, फागुन के दस्तूर।
                 amazon.in
पृथ्वी, मौसम, वनस्पति, भौरे, तितली, धूप,
सब पर जादू कर गई, ये फागुन की धूल।
                 amazon.in
फागुन का रंग और नशा सब पर चढ़ जाये

हुस्न या नसीब

एक   हसीन   लडकी
राजा  के  दरबार   में
डांस   कर  रही   थी...
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( राजा   बहुत   बदसुरत   था )

 लडकी   ने   राजा   से   एक
 सवाल   की  इजाजत  मांगी
.amazon.in
राजा   ने  कहा ,
                     " चलो  पुछो ."
.amazon.in
लडकी   ने   कहा ,
   "जब    हुस्न   बंट   रहा   था
      तब   आप   कहां  थे..??
.amazon.in
राजा   ने   गुस्सा   नही  किया
बल्कि
मुस्कुराते   हुवे   कहा
   जब   तुम   हुस्न   की
    लाइन्   में   खडी
     हुस्न    ले   रही   थी , 

   तो   में
  किस्मत  की   लाइन  में  खडा
             किस्मत  ले  रहा  था
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          और   आज
     तुझ  जैसीे   हुस्न   वालीयां
      मेरी  गुलाम   की   तरह
       नाच   रही   है...........
.
इसलीय  शायर  खुब  कहते  है,
.
    " हुस्न   ना   मांग
      नसीब   मांग   ए   दोस्त ,
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       हुस्न   वाले   तो
      अक्सर   नसीब   वालों  के
      गुलाम   हुआ   करते   है...

      " जो   भाग्य   में   है ,
        वह   भाग   कर  आएगा,
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         जो   नहीं   है ,
         वह   आकर   भी
         भाग   जाएगा....!!!!!."
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यहाँ   सब   कुछ   बिकता   है ,
दोस्तों  रहना  जरा  संभाल  के,

बेचने  वाले  हवा भी बेच देते है,
      गुब्बारों   में   डाल   के,
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        सच   बिकता   है ,
        झूट   बिकता   है,
       बिकती   है   हर   कहानी,
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       तीनों  लोक  में  फेला  है ,
       फिर   भी   बिकता   है
       बोतल  में  पानी ,
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कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस   दिन  खिलोगे ,
टूट  कर  बिखर्र  जाओगे ,
जीना  है  तो
पत्थर   की   तरह   जियो ;
जिस   दिन   तराशे   गए ,
" भगवान " बन  जाओगे...!!!!
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बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,
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अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।
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आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,
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अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता!
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गिद्ध भी कहीं चले गए, लगता है उन्होंने देख लिया,
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कि इंसान हमसे अच्छा नोंचता है!

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर,

क्या मस्त तलवे चाटता है इंसान!

कोई टोपी, तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,

मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है!

जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी,

जिसकी खातिर बाप किडनी बेच देता है!

ये कलयुग है, कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें,

कली, फल, फूल, पेड़, पौधे सब माली बेच देता है!

धन से बेशक गरीब रहो, पर दिल से रहना धनवान,

अक्सर झोपड़ी पे लिखा होता है: "सुस्वागतम"

और महल वाले लिखते हैं:
"कुत्तों सॆ सावधान"

विद्युत विभाग( कविता)

बड़ी मेहनत के बाद मैंने *विद्युत विभाग * की नौकरी पायी है, विद्युत विभाग में आया तो जाना, यहाँ एक तरफ कुआँ तो दूसरी तरफ खाई है।

जहाँ कदम कदम पर ज़ि ल्लत, और घड़ी घड़ी पर ताने हैं,

यहाँ मुझे अपनी ज़िन्दगी के कई साल बिताने हैं।

अपनी गलती ना हो लेकिन क्षमा याचना हेतु हाथ फैलाने हैं.

फ़िर भी बात-बात पे चार्जशीट और पनिसमेन्ट ही पाने हैं.

जानता हूँ ये 'अग्निपथ' है, फिर भी मैं चलने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग का कर्मचारी हूँ।

जहाँ एक तरफ मुझे प्रशासन की, और दूसरी तरफ पब्लिक की भी सुननी है,

यानी मुझे दो में से एक नहीं, बल्कि दोनों राह चुननी हैं।

ड्यूटी अगर लेट हुयी तो अधिकारी चिल्लाते हैं.

गलती चाहे किसी भी की भी हो सजा तो हम ही पाते हैं.

दो नावों पे सवार हूँ फिर भी सफ़र पूरा करने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग  का कर्मचारी हूँ।

आसान नहीं है सबको एक साथ खुश रख पाना,

परिवार के साथ वक़्त बिताना, और _विद्युत विभागमें jobबचाना।

परिवार के साथ बमुश्किल कुछ वक़्त ही बिता पाता हूँ,

घर जैसे कोई मुसाफिर खाना हो, वहां तो बस आता और जाता हूँ।

फिर भी हर मोड़ पर मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग  का कर्मचारी हूँ

सेवंथ कमीशन की बात पर, हमें सालो लटकाया जाता है,

हक़ की बात करने पर ठेंगा दिखलाया जाता है।

ये एक लड़ाई है, इसमें सबको साथ लेकर चलने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग  का कर्मचारी  हूँ।

 देश के कोने कोने से आये लोगों ने, जहाँ विद्युत विभाग  कर्मचारी को अपना दुश्मन समझ लिया,

छुट्टी मिली ना घर जा सके, Duty में ही ईद-दिवाली-क्रिसमस मना लिया,

टिफ़िन से टिफ़िन जब मिलते हैं, तो एक नया ही ज़ायका बन जाता है,

खुद के बनाये खाने में, और घर के खाने में फ़र्क़ साफ़ नज़र आता है।

मजबूरी ने इतना कुछ सिखाया, आगे भी बहुत कुछ सीखने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग  का कर्मचारी हूँ
 लोग समझते है कि बड़ा मजा करते है, विद्युत विभाग की नौकरी में

 अब उन्हें कौन समझाए , विद्युत विभाग  के  कर्मचारी के लिए सरकार के पास सिर्फ वादे है,

पब्लिक चाहे मनमानी करे, स्टाफ के लिए बड़े सख्त कायदे हैं।

सबको मैं बदल नहीं सकता, इसलिए अब ख़ुद को बदलने वाला हूँ,

क्योंकि मैं विद्युत विभाग  का कर्मचारी हूँ।

                                                               ये कविता मेरे समस्त विद्युत विभाग कर्मियो को समर्पित है।

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान

 रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान                 
बन्द ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया ..

उसके मुॅंह में एक थैली थी, जिसमें सामान की
लिस्ट और पैसे थे ..

दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस
थैली में भर दिया ...

कुत्ते ने थैली मुॅंह मे उठा ली और चला गया

दुकानदार आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे
पीछे गया ये देखने की इतने समझदार
कुत्ते का मालिक कौन है

कुत्ता बस स्टाॅप पर खडा रहा, थोडी देर बाद
एक बस आई जिसमें
चढ गया .

कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे
कर दी, उस के गले के बेल्ट में पैसे और
उसका पता भी था

कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के
बेल्ट मे रख दिया

अपना स्टाॅप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे
चला गया और पूॅंछ हिलाकर कंडक्टर

को इशारा कर दिया
और बस के रुकते ही उतरकर चल दिया ..

दुकानदार भी पीछे पीछे चल रहा था ...

कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरोंसे
२-३ बार खटखटाया ...

अन्दर से उसका मालिक आया और लाठी से
उसकी पिटाई कर दी

दुकानदार ने मालिक से इसका कारण पूछा .. ??

मालिक बोला .. "साले ने मेरी नींद खराब कर दी,
चाबी साथ लेके नहीं जा सकता था गधा"

जीवन की भी यही सच्चाई है ..

आपसे लोगों की अपेक्षाओं का
कोई अन्त नहीं है ..

जहाँ आप चूके वहीं पर लोग बुराई निकाल लेते हैं और पिछली सारी अच्छाईयों को भूल जाते हैं .

इसलिए अपने कर्म करते चलो, लोग
आपसे कभी संतुष्ट नहीं होएँगे।।
                  

बुधवार, 8 मार्च 2017

दोस्ती

आप भले ही करोड़ों की जायदाद के मालिक हो पर जब तक
शाम को चार दोस्त आपका इंतजार न कर रहे हो आप गरीब हो।

एक दोस्त ने क्या खूब लिखा है कि

"मरने के बाद मुझे जल्दी ना जला देना
मेरे दोस्तों को देर से आने की आदत है" ....!

दोस्ती शब्द का अर्थ
बड़ा ही मस्त होता है _ ( दो+हस्ती )
जब दो हस्ती मिलती हैं
                  तब दोस्ती होती है
 समुंदर _ना हो तो _ कश्ती  _ किस काम कीं                                      
मजाक _ना हो , तो  _ मस्ती  _ किस काम की                            
दोस्तों  _ के लिए तो कुर्बान है , ये _ _ जिंदगी                          
अगर  _ दोस्त  _ ही ना हो , तो फिर ये _ जिंदगी  _ किस काम कीं
           चंद लाइने दोस्तों के नाम

"क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं "दोस्त"
                     "क्यूँ गम को बाँट लेते हैं "दोस्त"
"न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है !
       "फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं "दोस्त "

मै झुकता हूँ, क्योंकि

     मै झुकता हूँ, क्योंकि
     मुझे रिश्ते निभाने का
     शौक है...;
     वरना
     गलत तो हम कल भी
     नहीं थे और आज भी
     नहीं हैं...

     मैं अपने गम में रहता हूँ,
     नबाबों की तरह..!!
     परायी खुशियों के पास
     जाना मेरी आदत नहीं...!

     सबको हँसता ही देखना
     चाहता हूँ मैं,
     किसी को धोखे से भी
     रुलाना मेरी आदत नहीं..,

     बाँटना चाहता हूँ, तो बस
     प्यार और मोहब्बत...,
     यूँ नफरत फैलाना मेरी
     आदत नहीं...!!

     जिंदगी मिट जाए, किसी
     के खातिर गम नहीं,
     कोई बद्दुआ दे मरने की
     यूँ जीना मेरी आदत
     नहीं...!

     दोस्ती होती है, दिलों से
     चाहने पर,
     जबरदस्ती दोस्ती करना,
     मेरी आदत नहीं..!

     नाम छोटा है, मगर दिल
     बड़ा रखता हूँ...,
     पैसों से उतना अमीर
     नहीं हूँ...,
     मगर,
     अपने यारों के गम...
     खरीदने की हैसियत
     रखता हूँ।     

अंबेडकर के नाम मे है दलितों के विकास का सूत्र

भीमराव अंबेडकर के नाम मे है  दलितों के विकास का सूत्र
__/!\___

भी :- भीख नहीं मांगेगे ।
म:- मेहनत हमेशा करेंगे ।
रा:- राज करेंगे ।
व:- वक्त का सदुपयोग करेंगे ।

अं:- अंधविश्वासो से मुक्त रहेंगे ।
बे:- बेगारी नही करेंगे  ।
ड:- डर कर नहीं रहेंगे ।
क:- कला मे निपुण रहेंगे ।
र:- रहन सहन पर ध्यान देगे और आपस मे भाईचारा बनाये रखेंगे ।
जय भीम🙏जय भारत
अगर सटीक लगे तो सभी दलितों को शेयर करें  

आरक्षण :- क्या दस साल तक की परिसीमा निर्धारित है ?

-जिसको इस बात की जानकारी नहीं है वे अपने विरोधियों को इस के बारे में बताएं।

-जो बार बार कहतें हैं कि आरक्षण 10 साल के लिए था।

-बाबा साहेब तो 10 साल के आरक्षण के लिए दे कर गए थे।

-आप को मुफ्त की खाने की आदत है।

-ऐसे आरोप लगातें हैं तो उन लोगो को बता दो की ये हमारे महापुरुषों की मेहनत का परिणाम है।

जब तक जाति है तब तक आरक्षण है

आरक्षण से जाति नही आयी अपितु जाति से आरक्षण आया है

-जिस दिन मनुवादी ब्राह्मण देश से जाति खत्म कर देंगे हम आरक्षण उसी दिन से छोड़ देंगे।

-परंतु मनुवादी ब्राह्मण ऐसा नही करेगा क्योंकि वर्ण और जाति के कारण ही वह शासक बना हुआ है।

-अगर यह खत्म तो मनुवादी ब्राह्मणवाद ख़त्म हो जायेगा,
सत्ताविहीन हो जायेगा, इसलिए मनुवादी ब्राह्मण को मुँह तोड़ जबाब दो।

आरक्षण चार प्रकार का है

1 :- राजनैतिक आरक्षण
2 :- नौकरियों का आरक्षण
3 :- व्यवसायिक शिक्षा का आरक्षण
4 :-  पदोन्नती में आरक्षण

अनुच्छेद- 330 लोकसभा का आरक्षण है

अनुच्छेद- 332 विधानसभा में आरक्षण है

अनुच्छेद- 334 में राजनैतिक रिजर्वेशन की 10 बर्ष की परिसीमा है।

केवल - राजनैतिक आरक्षण में ही हर दस साल बाद समीक्षा होनी चाहिए।

---मूलभूत अधिकार---
अनुच्छेद- 15-(4)
अनुच्छेद- 16-(4)
---संवैधानिक मूल अधिकार है---
अनुच्छेद - 15
अनुच्छेद - 16
से भारत का राष्ट्रपति ओर भारत का प्रधानमंत्री भी  छेड़छाड़ नही कर सकता।

--व्यसायिक शिक्षा मे आरक्षण
--नौकरियों का आरक्षण
--पदोन्नती में आरक्षण

यह संविधान में मूल अधिकार है जिनकी कोई परिसीमा नही है

 संविधान में 'आरक्षण' यह शब्द कहीं भी नहीं लिखा सिर्फऔर सिर्फ "प्रतिनिधित्व" (Representation)  शब्द का प्रयोग किया गया है।

माफ

दर्जनों ऐसे कवि देखने हैं जो कहते हैं बस कहते हैं होता है
 सुकून जिंदगी में अक्सर पर नफरतों के बयान देते है 
यह कोई और नहीं हमारे देश के नेता हैं जो बस कहते हैं कहते हैं कहते हैं
 होना है जो होकर रहता है
 बयानों से देश का क्या भला होता है 
हम तो वह भेड़ की तरह है जिसका कंबल हमको भी उड़ना है
 क्योंकि देश को ऐसे चलना है
बिजली का बिल 
 किसानों का पैसा माफ
 कर माफ
 एक दिन ऐसा समय आएंगे
 तुम्हारी जिंदगी मैं तूफान लाएगा माफ माफ करने वालों माफ ही तुम्हें रुलाएगा सत्ता मिलने के बाद 
 बोल नेता ही तुम पर कर लगाएगा 

एक तनख्वाह से कितनी बार  कर दूं और क्यों...जबाब है???
मैनें तीस दिन काम किया, 
तनख्वाह ली - कर दिया
मोबाइल खरीदा - कर दिया--'
रिचार्ज किया - कर दिया
डेटा लिया - कर दिया
बिजली ली - कर दिया
घर लिया -  कर दिया
TV फ्रीज़ आदि लिये -  कर दिया
कार ली -  कर दिया
पेट्रोल लिया - कर दिया
सर्विस करवाई -  कर दिया
रोड पर चला - कर दिया
टोल पर फिर -  कर दिया
लाइसेंस बनाया -  कर दिया
गलती की तो - कर दिया
रेस्तरां मे खाया -  कर दिया
पार्किंग का - कर दिया
पानी लिया - कर दिया
राशन खरीदा - कर दिया
कपड़े खरीदे -  कर दिया
जूते खरीदे - कर दिया
कितबें ली - कर दिया
टॉयलेट गया - कर दिया
दवाई ली तो -  कर दिया
गैस ली - कर दिया
सैकड़ों और चीजें ली ओर -  कर दिया, कहीं फ़ीस दी, कहीं बिल, कहीं ब्याज दिया, कहीं जुर्माने के नाम पर तो कहीं रिश्वत के नाम पर पैसा देने पड़े, ये सब ड्रामे के बाद गलती से सेविंग मे बचा तो फिर  कर दिया----
सारी उम्र काम करने के बाद कोई सोशल सेक्युरिटी नहीं, कोई पेंशन नही, कोई मेडिकल सुविधा नहीं, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल नहीं, पब्लिक ट्रांस्पोर्ट नहीं, सड़कें खराब, स्ट्रीट लाईट खराब, हवा खराब, पानी खराब, फल सब्जी जहरीली, हॉस्पिटल महंगे, हर साल महंगाई की मार, आकस्मिक खर्चे व् आपदाएं , उसके बाद हर जगह लाइनें।।।।
सारा पैसा गया कहाँ????
करप्शन में , 
इलेक्शन में ,
अमीरों की सब्सिड़ी में ,
माल्या जैसो के भागने में
अमीरों के फर्जी दिवालिया होने में ,
स्विस बैंकों में ,
नेताओं के बंगले और कारों मे,    
अब किस को बोलूं कौन चोर है???
आखिर कब तक हमारे देशवासी यूंही घिसटती जिन्दगी जीते रहेंगे?????